आज के समय में, विद्युत उपकरणों और मोटर्स को ओवरलोडिंग से बचाना बहुत जरूरी है। Thermal Overload Relay एक ऐसा सुरक्षा उपकरण है, जो मोटर्स और अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरणों को अधिक करंट से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर में मोटर प्रोटेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Circuit में जब भी overload या over-current आता है तो यह उपकरण सर्किट में लगे उपकरणों के लिए एक सुरक्षा उपकरण की तरह कार्य करता है ।
अगर आप एक Electrical इंजीनियरिंग के छात्र हैं, इलेक्ट्रिशियन हैं या फिर interview की तैयारी कर रहे हैं तो आपको यह जानना जरूरी हो जाता है कि Thermal Overload Relay क्या होता है ? तो आज की इस लेख में हम आपको बताएंगे कि Thermal Overload Relay क्या होता है, Thermal Overload Relay कैसे कार्य करता है, Thermal Overload Relay कितने प्रकार होते हैं , और Thermal Overload Relay सर्किट में लगाने से क्या लाभ मिलता है।

Thermal overload relay क्या होता है?
Thermal Overload Relay एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है, जिसका उपयोग विद्युत मोटरों और अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरणों को ओवरलोड से बचाने के लिए किया जाता है। यह तब सक्रिय होता है जब मोटर में करंट सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है, जिससे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है। यह रिले बाइमेटलिक स्ट्रिप के सिद्धांत पर काम करता है, जो अधिक तापमान पर झुककर सर्किट को ट्रिप कर देता है और मोटर को बंद कर देता है।
इसकी आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि ओवरलोड की स्थिति में मोटर अधिक गर्म हो सकती है, जिससे इसकी वाइंडिंग जलने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। थर्मल ओवरलोड रिले मोटर को ओवरकरंट और अत्यधिक तापमान से बचाने के साथ-साथ उसके जीवनकाल को भी बढ़ाता है। जब यह रिले ट्रिप होता है तो इसे ऑटोमैटिक और मैन्युअल रूप से रीसेट किया जा सकता है ।
इस रिले को मोटर को power supply देने से पहले लगाया जाता है ताकि जब भी मोटर में ओवरलोड या phase failure हो तो ओवरलोड रिले ट्रिप होकर मोटर में होने वाले क्षति को रोक सके। आपको यह जानना बहुत जरुरी है कि यह Relay केवल और केवल सर्किट में आने वाले ओवरलोड और phase failure को ही रोकता है। Earth Fault या short circuit Fault जैसे फाल्ट से यह रिले प्रोटेक्शन नहीं देता है।
Overload Relay एक सुरक्षा डिवाइस (Protection Device) है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर और अन्य विद्युत उपकरणों को अधिक करंट (Overcurrent) और ओवरलोड से बचाने के लिए किया जाता है। जब मोटर में आवश्यकता से अधिक करंट प्रवाहित होता है, तो यह रिले सर्किट को ट्रिप कर देता है और मोटर को बंद कर देता है, जिससे मोटर को जलने या खराब होने से बचाया जाता है।
Thermal overload relay की संरचना
Thermal Overload Relay मुख्य रूप से बाइमेटलिक स्ट्रिप और स्विचिंग मैकेनिज्म पर आधारित होता है। इसकी संरचना में कई महत्वपूर्ण घटक शामिल होते हैं, जो इसे प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद करते हैं।
मुख्य घटक ( Main Components )
- बाइमेटलिक स्ट्रिप (Bimetallic Strip)
- हीटिंग एलिमेंट (Heating Element)
- कॉन्टैक्ट सिस्टम (Contact System)
- समायोजन नॉब (Adjustment Knob)
- रीसेट बटन (Reset Button)
- टेस्ट बटन (Test Button)
1. बाइमेटलिक स्ट्रिप (Bimetallic Strip)
बाइमेटलिक स्ट्रिप दो अलग-अलग धातुओं की पतली परतों से बनी होती है, जिनकी तापीय प्रसार दर (Thermal Expansion Rate) अलग-अलग होती है। आमतौर पर इसमें निम्नलिखित धातुएं होती हैं:
1.पीतल (Brass) या तांबा (Copper): जो जल्दी गर्म होती है और अधिक फैलती है।
2.लौह (Iron) या स्टील (Steel): जो धीमी गति से गर्म होती है और कम फैलती है।
जब यह स्ट्रिप गर्म होती है, तो अधिक प्रसार दर वाली धातु दूसरी धातु की तुलना में अधिक फैलती है, जिससे स्ट्रिप झुक जाती है।


2. हीटिंग एलिमेंट (Heating Element)
हीटिंग एलिमेंट एक प्रतिरोधक (Resistor) सामग्री से बना होता है, जो विद्युत करंट प्रवाहित होने पर गर्मी उत्पन्न करता है। यह एक धातु तार या स्ट्रिप होती है, जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि जब सर्किट में अधिक करंट प्रवाहित हो, तो यह गर्म होकर बाइमेटलिक स्ट्रिप (Bimetallic Strip) को सक्रिय कर दे।
3. कॉन्टैक्ट सिस्टम (Contact System)
संपर्क प्रणाली थर्मल ओवरलोड रिले का वह हिस्सा है जो विद्युत कनेक्शन को बनाने या तोड़ने के लिए जिम्मेदार होता है। ये मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल सिग्नल के माध्यम से संचालित होता है और सर्किट को इंटरप्ट करता है जब ओवरलोड स्थिति का पता चलता है।
- Main Contacts (Normally Closed – NC):
- ये संपर्क सामान्य स्थिति में बंद रहते हैं, यानी करंट प्रवाह करते हैं।
- जब थर्मल ओवरलोड ट्रिगर होता है (ओवरहीट के कारण), ये संपर्क खुल जाते हैं और सर्किट ब्रेक हो जाता है।
2. Auxiliary Contacts (Normally Open – NO):
- ये संपर्क सामान्य स्थिति में खुले रहते हैं।
- ओवरलोड होने पर ये बैंड हो सकते हैं, जो अलार्म या इंडिकेटर को एक्टिवेट करने के लिए उपयोग करते हैं।

4. समायोजन नॉब (Adjustment Knob)
समायोजन नॉब एक घुमाने वाला नियंत्रण उपकरण (Rotary Control Knob) होता है, जो उपयोगकर्ता को थर्मल ओवरलोड रिले की ट्रिप करंट सेटिंग (Trip Current Setting) को एडजस्ट करने की अनुमति देता है। यह नॉब रिले पर एक स्पष्ट अंकित स्केल (Marked Scale) के साथ आता है, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से आवश्यक करंट सीमा (Current Limit) सेट कर सकता है।

5 . रीसेट बटन (Reset Button)
रीसेट बटन एक मैनुअल या ऑटोमैटिक बटन होता है, जिसे दबाने पर थर्मल ओवरलोड रिले को पुनः चालू (Reset) किया जा सकता है। यह आमतौर पर रिले के सामने या ऊपर की ओर स्थित होता है और विभिन्न प्रकार के रिले में अलग-अलग रूपों में उपलब्ध हो सकता है।

रीसेट बटन का कार्य:-
जब थर्मल ओवरलोड रिले ट्रिप हो जाता है, तो यह अपने संपर्क (Contacts) को खोलकर मोटर को बंद कर देता है।
रीसेट बटन को दबाने से रिले की बाइमेटलिक स्ट्रिप अपनी मूल स्थिति में आ जाती है और रिले फिर से चालू हो जाता है।
यदि मोटर बार-बार ट्रिप हो रही है, तो इसका मतलब है कि कोई समस्या है, जैसे कि ओवरलोड, खराब वाइरिंग, या शॉर्ट सर्किट।
रीसेट बटन केवल तभी कार्य करेगा जब मोटर सुरक्षित रूप से चालू करने योग्य होगी।
6. टेस्ट बटन (Test Button)
टेस्ट बटन एक मैनुअल बटन होता है, जो थर्मल ओवरलोड रिले में दिया जाता है। इसे दबाने पर रिले कृत्रिम रूप से ट्रिप (Trip) हो जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि रिले सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। टेस्ट बटन दबाने से रिले सक्रिय (Activate) होता है और यह जांचा जाता है कि रिले सही तरीके से ट्रिप हो रहा है या नहीं।
थर्मल ओवरलोड रिले का कार्य सिद्धांत
थर्मल ओवरलोड रिले का कार्य मुख्य रूप से तापीय विस्तार (Thermal Expansion) के सिद्धांत पर आधारित है। इसका कार्य करने का तरीका निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
- बाइमेटलिक स्ट्रिप (Bimetallic Strip):
- थर्मल ओवरलोड रिले में एक बाइमेटलिक स्ट्रिप होती है, जो दो अलग-अलग धातुओं से बनी होती है। ये धातुएं तापमान के बढ़ने पर अलग-अलग दर से फैलती हैं।
- ओवरलोड की स्थिति:
- जब मोटर सामान्य करंट पर कार्य करती है, तब बाइमेटलिक स्ट्रिप अपनी सामान्य स्थिति में रहती है।
- जब मोटर पर अधिक लोड (Overload) आता है, तो करंट बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रिप गर्म होकर झुक जाती है।
- संपर्क (Contacts) का खुलना:
- जैसे ही बाइमेटलिक स्ट्रिप एक निश्चित तापमान तक गर्म होकर झुकती है, यह रिले के ट्रिपिंग मैकेनिज्म को सक्रिय कर देती है।
- इससे मुख्य सर्किट का संपर्क (Contact) खुल जाता है, जिससे मोटर को बिजली मिलना बंद हो जाता है।
- रीसेट (Reset) की प्रक्रिया:
- जब बाइमेटलिक स्ट्रिप ठंडी हो जाती है, तब यह अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाती है।
- कुछ रिले मैन्युअल रीसेट (Manual Reset) होते हैं, जिन्हें चालू करने के लिए बटन दबाना पड़ता है।
- कुछ रिले ऑटोमेटिक रीसेट (Automatic Reset) होते हैं, जो ठंडा होने के बाद खुद से चालू हो जाते हैं।
इस प्रकार एक ओवरलोड रिले कार्य करता है।
थर्मल ओवरलोड रिले का उपयोग (Applications of Thermal Overload Relay)
इस रिले का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत मोटरों और औद्योगिक उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह मोटरों को ओवरलोड और अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका व्यापक उपयोग इलेक्ट्रिक मोटरों, पंपों, कंप्रेसरों, कन्वेयर बेल्ट, और अन्य मशीनरी में किया जाता है, जहां लगातार संचालन के कारण ओवरलोड होने की संभावना रहती है। औद्योगिक संयंत्रों, HVAC सिस्टम, कृषि उपकरणों जैसे सबमर्सिबल पंप और ट्यूबवेल में भी इसे सुरक्षा उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा, विद्युत वितरण प्रणाली, नियंत्रण पैनलों और घरेलू उपकरणों जैसे वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर में भी इस रिले का उपयोग किया जाता है।
थर्मल ओवरलोड रिले के लाभ
थर्मल ओवरलोड रिले के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं, जो इसे मोटरों और विद्युत उपकरणों की सुरक्षा के लिए एक आवश्यक उपकरण बनाते हैं। यह रिले ओवरलोड की स्थिति में मोटर को क्षति से बचाकर उसकी कार्यक्षमता और को बढ़ाने में मदद करता है।
इस रिले से होने वाले लाभ निचे बताया गया है।
- स्वचालित सुरक्षा (Automatic Protection): ओवरलोड की स्थिति में यह रिले मोटर को खुद ही ट्रिप करके सुरक्षित करता है।
- समायोज्य सेटिंग्स (Adjustable Settings): अलग-अलग करंट रेटिंग के अनुसार इसे सेट किया जा सकता है।
- ऊर्जा कुशल (Energy Efficient): यह रिले अनावश्यक बिजली कटौती को रोककर ऊर्जा की बचत करता है।
- कम लागत और सरल डिजाइन (Cost-Effective & Simple Design): इस प्रकार के रिले सस्ता, टिकाऊ और रखरखाव में आसान होते है।
- मैन्युअल और ऑटोमेटिक रीसेट (Manual & Automatic Reset): इस रिले को जरूरत के अनुसार रीसेट किया जा सकता है।
- विद्युत प्रणाली की सुरक्षा (Electrical System Protection): यह रिले ओवरहीटिंग और शॉर्ट-सर्किट से सुरक्षा प्रदान करता है।
- मोटर की आयु बढ़ाता है (Increases Motor Lifespan): यह रिले मोटर को अधिक गर्मी और ओवरलोड से बचाता है।
- औद्योगिक और घरेलू उपयोग (Industrial & Household Applications): पंप, कंप्रेसर, वॉशिंग मशीन और अन्य उपकरणों में इस रिले का उपयोग किया जाता है।
- कम रखरखाव (Low Maintenance): इस प्रकर के रिले को इंस्टॉल करने के बाद ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती है ।
हम आशा करते हैं कि यह लेख Thermal Overload Relay के बारे में आपकी समझ को और गहरा करने में सहायक रहा होगा। इस लेख में हमने इसके कार्य सिद्धांत, संरचना, उपयोग, और लाभों पर विस्तार से चर्चा की है। यदि आप इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं, इलेक्ट्रिशियन हैं, या किसी परीक्षा या इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
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